Friday, July 17, 2015


ईफ्तार                                                                               06.07.2015


आत्ताच एका मित्राने what'sapp वर ईफ्तारच निमंत्रण दिलं म्हटला... आजा मीनारा मस्जिद जाऐंगे ईफ्तार के बाद नॉनवेज खाऐंगे... तर त्याबरोबर बातचीत चालू असताना मी मला आजपर्यंत पडलेले काही प्रश्न त्याला विचारले..
मी : सात बजे के बाद खाना खाते है उसे क्या कहते है?
तो : "ईफ्तार" और सुबह चार बजे के खाने को "सेहरी" कहते है
मी : Ya I heard about iftar party..
तो : सही सुना है..
मी : मीनारा मस्जिद किधर है?
तो : मीनारा मस्जिद, मस्जिद मुंबई में है, CST स्टेशन से नजदिक है..
मी : By the way मुझे मस्जिद आना allow है क्या?.. खासकर एक हिंदू ब्राम्हण को... Actually I am not believe on जात, धर्म एक curiosity है... बहुत सालोंसे मन में था इसलिए पूछा???
तो : Ya why not '..अगर आप सच्चे दिलसे आओगे तो सब allowed है!!!
मी : Okay.. Then I am ready to join you...
तो : आजा तारीख बना... निकलते है! मी : लेकिन एक आखिरी सवाल... मस्जिद आने के लिए मुझे क्या कुछ करना होगा???
तो : हा.. घरसे निकलते वक्त धुले कपड़े, अच्छेसे स्नान करके आना होगा... जिसे हम "पवित्र पाक साफ" कहते हैं.. और मस्जिद के अंदर जाते समय "वुझु" भी करना होता है जैसे हाथ, पैर, सर और चेहरे को भिगोना होता है...
मी : ठीक है DONE!.. Next Saturday/Sunday चलते है..
तो : Thursday नहीं तो Friday चलते है.. अच्छे दिन मानते है! (शुभदिवस).
मी : no problem! तो : हाजी अली, माहीम दर्गा और आखिर में मीनारा ठिक है..?
मी : हा ठीक है.. कोई वांदा नै!

-सुंदर...!

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