Wednesday, October 9, 2019

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
जितना हुँ मै यहापर उतनाही हुँ मै वहापर...
खोकर तुमको यहाँपर वापस चला जाता हुँ मै...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
लंबा है रस्ता पर उतना दुर नही...
वापस न आने की अब कोई भुल नही...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
इस शहर की मिट्टी पर चढ गई है बेकाबु सडके...
सावन कें मौसम में तबाही कीही खबरें धडकें...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
खयाल रखना अपना हर खुशी तुम्हारे गालों को चुमती रहें...
घर पर इंतजार कर रही हर माँ की दुवा तुम्हें मिलती रहें...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
जाने क्यु ढुंढती रहेगी ये आँखे उस तस्वीर मे छुपा चेहरा...
छोडकर जाते वक्त निकले हर आसुओ का लब्ज हो गहरा...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
तुम तितलीसी बनकर उडती रहना हर बगिया में खिलती रहना...
आसमान सें कैसें दिखता हैं नजारा बस इतना ही मुझें कहते रहना...

बस्स्स..
एक बात बताकर जाता हुँ मै...
बेहत प्यारा सा एक सितारा था बिन पैसे खुब घुमता था...
अपनी प्यारी बातों सें सबको खुब हसाता था...
खुशीयो की रझाई ओढकर सपनों से बातें करता था...

एक बात बताकर जाता हुँ मै...
यहीं एक बात बताकर चला जाता हुँ मै......



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